मूरत नैंनन में रमै
Dohavali Nnd — श्री नागरीदास
Verse 4 of 4
यह मन मारि जिवाईये, जियत न आवै काज।
मारग रसिक नरेस के, चलनौं है इह साज॥
- श्री नेह नागरी दास, श्री नेह नागरी दास जी की वाणी, दोहावली (42)
याह मन मरि जिवै, जियत् न आवै काज। रसिक नरेस का मार्ग, यही है साधन.. - श्री नेह नागरी दास, श्री नेह नागरी दास जी के वचन, दोहावली (42)