मूरत नैंनन में रमै

Dohavali Nnd — श्री नागरीदास

Verse 3 of 4

मूरत नैंनन में रमै, हिय मथि गुन रहै पूरि। दशा न कोऊ समझि है, प्रेम पहुचनौ दूरि॥ - श्री नेह नागरीदास, श्री नेह नागरीदास जी की वाणी, दोहावली (23) मेरा हृदय मूर्तियों से भरा है, मेरा हृदय सद्गुणों से भरा है। परिस्थितियाँ कितनी भी अच्छी क्यों न हों, प्रेम दूर तक पहुँचता है.. - श्री नेह नागरीदास, श्री नेह नागरीदास जी के वचन, दोहावली (23)
मूरत नैंनन में रमैमूरत नैंनन में रमै