देखो देखो ब्रजकी बीथिनि बीथिनि खेलत हैं हरि होरी

Gadadhar Bhatt Vani — श्री गदाधर भट्ट

Verse 10 of 10

यह सुख जो हृदय रहे, तो मिटे मन दाहु। कहत हैं गदाधर, चित, इत उत नहिं जाहु॥ - श्री गदाधर भट्ट, श्री गदाधर भट्ट जी की वाणी (52.13) यह खुशी दिल में रहेगी तो मन का दर्द दूर हो जाएगा। गदाधर कहते हैं, चित, यह दूर नहीं जाना चाहिए.. - श्री गदाधर भट्ट, श्री गदाधर भट्ट जी का भाषण (52.13)
सुखद वृंदावन सुखद यमुना तट