सुखद वृंदावन सुखद यमुना तट
Gadadhar Bhatt Vani — श्री गदाधर भट्ट
Verse 9 of 10
(राग मलार)
सुखद वृंदावन सुखद यमुना तट
सुखद कुंज भवन रच्यौ है हिंडोरौ।
सुखद कलपतरु सुखद फलफूल
सुखद वहति सीतल पवन झकौरौ॥ [1]
सुखद रंगीले संग सुखद रंगीली राधा
सुखद करत केलि रतिपति जोरौ।
सुखद सखी झुलावैं, सुखद गीत गावैं
सुखद गरजि बरषत थोरौ थोरौ॥ [2]
सुखद हरित भूमि सुखद बूंदनि रंग
सुखद कोकिला कल मोर चकोरौ।
सुखद बजावै वेनु सुजस सुनि
सुखद गदाधर चित्त कौ चोरौ॥ [3]
- श्री गदाधर भट्ट, श्री गदाधर भट्ट जी की वाणी (74)
(राग मलारा) सुहावना वृन्दावन, सुहावना यमुना और सुहावना कुंज भवन हिंडोरौ द्वारा रचित हैं। सुखद कल्पतरु, सुखद फलदायक, सुखद शीतल पवन झकौरौ। [1] सुहावनी, रंग-बिरंगी, मनभावन, रंग-बिरंगी राधा, मनभावन, केली रतिपति जोरौ। सुहावने सखियाँ झूलें, सुहावने गीत गाएँ, सुहावना गराजी बरसे, थोरौ थोरौ.. [2] सुहावनी हरी भूमि, सुहावनी बुंदनी रंज, सुहावनी कोकिला, कल मोर चकोरौ। सुखा बाजवै वेणु सुजस सुनि सुखदा गदाधर चित्त कौ चोरौ.. [3] - श्री गदाधर भट्ट, श्री गदाधर भट्ट जी का भाषण (74)