अब कछु बाधा नाहिं रही
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 1 of 48
(राग रामकली)
अब कछु बाधा नाहिं रही।
मदन गुपाल मिले सुखदायक साधा सबै लही। [1]
रोम रोम अति हरष भयौ है जीवन सफल सही।
आनँदघन या रस की संपति कैसें परति कही॥ [2]
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (86)
(राग रामकली) अब कछुआ बढ़ नहीं रहा है. मदन गोपाल सदैव सबको खुश रखते थे। [1] सर्वत्र सुख अपार हो, जीवन सफल हो। आनंदघन रस का स्रोत कहां है? [2] - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (86)