रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 2 of 48

(सवैया) अति सुधौ सनेह को मारग है, जहाँ नेक सयानप बाँक नहीं। [1] जहाँ साँच चलें तजि आपुनपो, झिझकैं कपटी जो निसाँक नहीं॥ [2] घन आनंद प्यारे सुजान सुनो, इत एक तें दूसरी आंक नहीं। [3] तुम कौन सी पाटी पढ़े हो लला, मन लेत पै देत छटॉक नहीं॥ [4] - श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली, सुजान हित (267) (सवैया) परम पवित्र प्रेम का मार्ग है, जहाँ नेक इरादों का कोई बैंक नहीं है। [1]. [3] लाला, तूने मुझे कौन सा पति सिखाया है? मेरा मन लेटने से नहीं रुकता.. [4] - श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली, सुजान हित (267)
अब कछु बाधा नाहिं रहीरँगीली जोरी की बलि जाँव