इस्कलता ब्रजचंद की जो बाँचै दै चित्त
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 43 of 48
आनँद के घन छैल सों, करि ले चित को चाव।
इस्कलता जौ चाहिए, तौ बृंदावन आव॥
- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, इश्क़लता (43)
बेटे, आनंद के घन उँडेलो, मन का आनंद लो। इश्कलता जौ चाहिए, ताऊ बृंदावन आवा.. - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, इश्कलता (43)