तेरे नैंन मेरे नैंन मेरे नैंन तेरे नैंन

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 46 of 48

(सवैया) माँगौं न मोष भयोवास घोष, (मैं) और अबैं न कछु जिय धारौं। [1] या रज कै बिन जो जगमें, सब सो सुख लोभ हि तुच्छ बिचारों॥ [2] लच्छन छत्रपतीन की लच्छमी, ‘नागर’ नैंननि हूँ न निहारौं। [3] राज सबैं भुव मण्डल के, व्रज मण्डल ऊपर वारि के डारौं॥ [4] - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक कवित्त (87) (सवैया) मनगौं न मोष भयोवास घोष, (मैं) और आबैन न कछू जिया धरौं। [1] अथवा राजा के बिना संसार का सारा सुख और लोभ ही लोभ है। [3] भुवा मंडल के राज सबैन, अपर वारी के व्रज मंडल.. [4] - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिन्हा), श्री नागरीदास जी के शब्द, लघु कविता (87)
तेरे नैंन मेरे नैंन मेरे नैंन तेरे नैंनतेरे नैंन मेरे नैंन मेरे नैंन तेरे नैंन