तेरे नैंन मेरे नैंन मेरे नैंन तेरे नैंन
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 47 of 48
(कवित्त)
तेरे नैन सावन की कारी अंधियारी घटा,
ता ऊपर मेरे नैंन घटा घनघोर है। [1]
तेरे नैन कलि मैं कल्प वृक्ष प्रगटे आय
ता ऊपर मेरे नैन बिच बिच मोर है॥ [2]
तेरे नैन उड़गति सी ऊची उतंग भरै,
ता ऊपर मेरे नैंन चंद्र चकोर है। [3]
तेरे नैन मेरे नैन मेरे नैन तेरे नैन,
मेरे नैन चोरिवे को तेरे नैन चोर है॥ [4]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक कवित्त
(कविता) तुम्हारी आँखों में एक अँधेरा शून्य है, मेरी आँखों के ऊपर का शून्य सघन है। [1] तुम्हारी आंखों में कल्प वृक्ष प्रकट हो गया है, और मेरी आंखों के ऊपर एक मोर है.. [2] तुम्हारी आंखों में, आकाश के समान ऊंचा आकाश है, और मेरी आंखों के ऊपर, एक चौकोर चंद्रमा है। [3] तुम्हारी आंखें मेरी हैं।