श्रीवृन्दावन रज परस
Git Govind Braj Bhasha — श्री रामराय
Verse 1 of 5
श्रीवृन्दावन रस सुधा, सिंधु निमज्जत जोय।
ताको तीनो ताप को, कबहु ताप नहिं होय॥
- श्री रामराय, गीत गोविंद ब्रज भाषा, दोहा (81)
श्री वृन्दावन का रस मधुर है, सिन्धु आनन्द में डूबा हुआ है। ताको तीनो तप को, कबहु तप नहीं होय.. - श्री राम राय, गीत गोविंद ब्रज भाषा, दोहा (81)