श्रीवृन्दावन रज परस

Git Govind Braj Bhasha — श्री रामराय

Verse 4 of 5

वृन्दावन की याद जो, आवत है मन मांहि। तबही राधा नागरी, पति संग ताहि सरांहि॥ - श्री रामराय, गीत गोविंद ब्रज भाषा, दोहा (85) मुझे बार-बार वृन्दावन की याद आती है। तबहि राधा नागरी, पति सहित ताहि सरनाही.. - श्री राम राय, गीत गोविंद ब्रज भाषा, दोहा (85)
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