श्रीवृन्दावन रज परस
Git Govind Braj Bhasha — श्री रामराय
Verse 3 of 5
तन वृन्दावन वास कर, धन वृन्दावन वास।
मन वृन्दावन लीन कर, वृन्दावन रसरास॥
- श्री रामराय, गीत गोविंद ब्रज भाषा, दोहा (84)
तेरा शरीर वृन्दावन में रहे और तेरा धन वृन्दावन में रहे। वृन्दावन का हृदय लो, वृन्दावन रसरस.. - श्री राम राय, गीत गोविंद ब्रज भाषा, दोहा (84)