परम प्राण धन कुंज में करत विहार विशाल

Hari Lila — श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी)

Verse 2 of 6

धन्य धन्य वृन्दावनी, लता ललित विस्तार। धन्य राधिका माधवी, मूरति धन्य विहार॥ - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (55) धन्य धन्य वृन्दावनी, लता ललित विस्तार। धन्य राधिका माधवी, मुराति धन्य विहार.. - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्मा गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (55)
जै जै माधो मन मोहिनी श्रीराधिकेपरम प्राण धन कुंज में करत विहार विशाल