परम प्राण धन कुंज में करत विहार विशाल
Hari Lila — श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी)
Verse 4 of 6
रसिक किशोरी नागरी, नागर रसिक किशोर।
जीवनिधन श्रीप्रियासखी, सहचरी जन चितचोर॥
- श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (11)
रसिक किशोरी नागरी, नागर रसिक किशोर। जीवन निधान श्री प्रिया सखी, सबकी सहचरी.. - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्मा गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (11)