परम प्राण धन कुंज में करत विहार विशाल

Hari Lila — श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी)

Verse 5 of 6

श्री राधा रस मोहिनी, मोहे मोहनलाल। पीवत तृप्ति न होत हैं, ‘प्रिया सखी’ प्रतिपाल॥ - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (6) श्री राधा रस मोहिनी, मोहे मोहनलाल। जगत में तृप्ति नहीं, प्रतिपल 'प्रिया सखी'.. - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्मा गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (6)
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