रसना कटौ जो अन रटौ

Hit Sfut Vani — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 24 of 26

तातैं भैया मेरी सौं कृष्ण-गुण संचु। [1] कुत्सित वाद विकारहिं परधन सुनु सिख मन्द पर-तिय बंचु। [2] मनिगन-पुंज व्रजपति छाँड़त हित हरिवंश कर गहि कंचु॥ [3] पाये जान जगत में सब जन कपटी कुटिल कलियुग-टंचु। [4] इहि-परलोक सकल सुख पावत, मेरी सौं कृष्ण-गुण संचु॥ [5] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, स्फुट वाणी (8) तातैन भैया, मेरे सौ कृष्ण-गुणों ने मुझे सिखाया है। [1] कुत्सित वद विकारहिं परधान सुनु सिख मंद पारा-तिय बंचू। [2]. (8)
रसना कटौ जो अन रटौतैं भाजन कृत जटित विमल