श्री हित स्फुट वाणी

Hit Sfut Vani

श्री हित हरिवंश महाप्रभु · 26 verses · Braj

  1. 1. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  2. 2. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  3. 3. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  4. 4. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  5. 5. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  6. 6. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  7. 7. हरि रसना राधा-राधा रट
  8. 8. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  9. 9. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  10. 10. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  11. 11. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  12. 12. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  13. 13. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  14. 14. तू रति रंगभरी देखियत है श्री राधे
  15. 15. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  16. 16. तेरौई ध्यान राधिका प्यारी गोवर्द्धनधर लालहिं
  17. 17. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  18. 18. ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
  19. 19. मोहन लाल के रंग राँची
  20. 20. दोऊ जन भीजत अटके बातन
  21. 21. रसना कटौ जो अन रटौ
  22. 22. रसना कटौ जो अन रटौ
  23. 23. रसना कटौ जो अन रटौ
  24. 24. रसना कटौ जो अन रटौ
  25. 25. तैं भाजन कृत जटित विमल
  26. 26. तैं भाजन कृत जटित विमल