मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग
Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि
Verse 13 of 31
नाहीं और रस की तहाँ, खटक कहूँ दिन रात।
पोषत प्यारी राधिका, जीवत सामल गात॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (9)
नहीं, रस की जगह खटक कहूँ, दिन-रात। प्रिय प्रिया राधिका, जीवित आत्मा... - श्री वंशी अली, हृदय ही सब कुछ है (9)