मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 14 of 31

नाहिं लोक सों लाज है, नाहिं वेद सों काज। एक कुंवरि सौं काज है, और करौ सब राज॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (23) नहीं, प्रजापुत्र को शर्म आती है, वेदपुत्र को नहीं। कुंवारी लड़की के सौ काम होते हैं, वो सारे राज़ रखती है.. - श्री वंशी अली, दिल ही सब कुछ है (23)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग