मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 18 of 31

नयन ही में नयन रहें, हिय में हियो समाय। भुजन भुजा लपटी रहें, यही एक रस भाय॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (8) आँखें तो मन की आँखें ही रहती हैं, हे मानव, संसार। बाहों में बंद होना, यही डर का सार है.. - श्री वंशी अली, दिल ही सब कुछ है (8)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग