मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 17 of 31

नरक परन आछो लगे, कुंवरि चरन के हेत। इन चरनन बिन ना चहों, नेक निकुंज निकेत॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (26) नर्क अच्छा लगता है, कुंवारे पैरों की खातिर। चरणन बिनु कामना, नेक निकुंज निकेत.. - श्री वंशी अली, हृदय ही सब कुछ है (26)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग