मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 20 of 31

राधा चेरी हों सखी, मेरे मन नहिं आन। वंशी अलि निज जीव का, सब विधि राधा मान॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (33) राधा चेरी, मुझे दोस्त बनने का मन नहीं है। मेरे जीवन के वंशी अली, राधा के मन में हैं सब विधि.. - श्री वंशी अली, हृदय ही सब कुछ है (33)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग