मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग
Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि
Verse 22 of 31
राधा जीभ रटों सदा, राधा सुनों सुकान।
श्री राधा नयनन देखिहों, राधा बिन नहीं आन॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (28)
राधा की जिह्वा सदैव रटती है, राधा सुकन की बात सुनती है। श्री राधा नयनन देहुं, राधा बिन नहिं नहिं अन.. - श्री वंशी अली, हृदय सर्वस्व (28)