मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 7 of 31

जलबिहार ते आदि सुष, सषियन के ही हेत। सखिजन अपने भाव करि, ताही में सब लेत॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (12) जलबिहार ते आदि सुष, केवल ससियाओं के लिए। दोस्तों अपना सर्वश्रेष्ठ करो, तभी इंसान सब कुछ हासिल कर सकता है.. - श्री वंशी अली, दिल ही सब कुछ है (12)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग