मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 6 of 31

हौं रूसोंगी कुँवरि सौं, कुँवरि मनावै मोहि। कुँवरि जो मो सौं रुसि है, हौं पाइनि परों निहोहि॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (39) मैं एक अकेली कुंवारी हूं, मैं कुंवारी हूं, मैं तुम्हें मोहित करती हूं। जिस कुँवारी के पास सौ रशियन हैं, मेरे पास तेज़ पंख नहीं.. - श्री वंशी अली, हृदय सर्वस्व (39)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग