केलि माधुरी सिंधु के, कोऊ न पावत पार
Keli Madhuri — श्री माधुरी दास
Verse 1 of 2
केलि माधुरी सिंधु के, कोऊ न पावत पार।
मन वच क्रम निशि दिन सदा, जीय विचारी विचारी॥
- श्री माधुरी दास, केलि माधुरी (125)
केली माधुरी सिन्धु की, कुओ न पावत पर। मन वाच क्रम निशि दिन सदा, जिया विचारी विचारी.. - श्री माधुरी दास, केली माधुरी (125)