केलि माधुरी सिंधु के, कोऊ न पावत पार

Keli Madhuri — श्री माधुरी दास

Verse 2 of 2

वृंदावन की बात में, जितै जितै मन जात। तितै तितै ताते अधिक, चितवत चित न अघात॥ - श्री माधुरी दास, केलि माधुरी (10) मन वृन्दावन की बात करता है, मन भटकता है। तिटै तिटै ताटै मोरे, चितावत चित न अघात.. - श्री माधुरी दास, केली माधुरी (10)
केलि माधुरी सिंधु के, कोऊ न पावत पार