द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 1 of 69

(राग कान्हरौ) रुचि के प्रकास परस्पर खेलन लागे। [1] राग रागिनी अलौकिक उपजत नृत्य संगीत अलग लाग लागे॥ [2] राग ही में रंग रह्यौ रंग के समुद्र में दोऊ झागे। [3] श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी पै रंग रह्यौ रस ही में पागे॥ [4] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (2) (राग कान्हरौ) रुचि की बत्तियाँ आपस में खेलने लगीं। [1] राग रागिनी अलौकिक नृत्य संगीत की विभिन्न ध्वनियाँ उत्पन्न करती है.. [2] राग ही मन रंग रहयौ रंग में दोउ झागे। [3] श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी पै रंग रहयौ रस ही पुरुष पृष्ठ.. [4] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (2)
द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा