द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 14 of 69
(राग कान्हरौ)
द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा
नेत्रनि दृष्टि लागै जिनि मेरी। [1]
हाथनि चारि चारि चूरी पाँइनि इकसार चूरा
चौपहलू इकटक रहे हरि हेरी॥ [2]
एक मरगजी सारी तन तें कंचुकी न्यारी
अरु अँचरा की बाँई गति मोरि उरसनि फेरी॥ [3]
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
या रस ही बस भये हरैं हरैं सरकनि नेरी॥ [4]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (20)
(राग कान्हारौ) लार और पतंगों का झुंड, मेरी पोती जो हमेशा मुझ पर नज़र रखती है। [1]. केलीमल (20)