द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 15 of 69
(राग कान्हरौ)
राधे दुलारी मान तजि।
प्रान पायौ जात है री मेरौ सजि॥ [1]
अपनौं हाथ मेरे माथे धरि अभै दान दै अजि।
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम कहत री प्यारी
रंग रुचि सौं बलि लजि॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (22)
(राग कान्हरौ) राधे दुलारी मन तजि। मुझे अपना जीवन प्यारा है.. [1] हे प्रभु, मेरे माथे पर अपना हाथ रख और मुझे अभय दे। श्री हरिदास के स्वामी श्याम कहते हैं प्यारा रंग, सौ यज्ञों में रुचि.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (22)