बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 23 of 69
(राग केदारौ)
ऐसी जिय होत जो जिय सौं जिय मिलै
तन सौं तन समाइ लैहुँ तौ देखौं कहा हो प्यारी। [1]
तोही सौं हिलगि आँखैं आँखिन सौं मिली रहैं
जीवत कौ यहै लहा हो प्यारी॥ [2]
मौकों इतौ साज कहाँ री हौं अति दीन तुव बस
भुव छेप जाइ न सहा हो प्यारी। [3]
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम कहत राखि लै री
बाहु बल हौं बपुरा काम दहा हो प्यारी॥ [4]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (35)
(राग केदारौ) जिंदगी ऐसी होगी कि सौ साल जीओगे तो सौ दिन में मिलोगे, देखूंगा कहां हो प्रिये। [1] तोहि सौं हिलगी अनखिन सौं मिलि रहैं जीवत को है लाहा हो प्रिये.. [2] इस मौके पर कहां आ गए हो, ज्यादातर दिन तो तुमने खुद को ऐसे ही छुपाया है प्रिये। [3] श्री हरिदास के स्वामी श्याम कहते हैं, राखी लै री बहु बल हूं बपुरा कम दहा हो प्यारी.. [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (35)