बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 26 of 69

(राग केदारौ) फूलीं सब सखी देखि देखि। [1] जच्छ किन्नर नागलोक देव स्त्रीं रीझि रहीं भुव लेखि लेखि॥ [2] कहत परस्पर नारि नारि सौं यह सुन्दर्यता अव रेखि रेखि। [3] श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा ए कैसे हूँ चितयैं परेखि रेखि॥ [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (42) (राग केदारौ) फूलिन ने अपने सभी दोस्तों की ओर देखा। [1] मातृ किन्नर नागलोक देव स्त्री रेझि रहिन भुव लेखि लेखि.. [2] स्त्रियाँ एक दूसरे से कहती हैं, यह सौंदर्य और रेखा है। [3] श्री हरिदास के स्वामी श्याम ए कैसे हूं चिताएं पारखी रेखी.. [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (42)
बचन दै मान न करौंबिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी