बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 27 of 69
(राग केदारौ)
पिय सौं तू जोई जोई करै सोई छाजै ।
और सेंघ करै जो तेरी सोई लाजै॥ [1]
तू सुर ज्ञान सब अंग सखी री मान करत बेकाजै ।
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम जिय में बसै
तू नित नित बिराजै॥ [2]
- श्री स्वामी हरिदास, केलीमाल (43)
(राग केदारौ) पिया सौं तू जोई करै सोई छाजै। और उसे चोदो जो तुम्हारे साथ सोता है.. [1] तुम एक मित्र की तरह महसूस करते हो, जिसके पास ध्वनि, ज्ञान और सभी अंग हैं। श्री हरिदास प्रभु, स्याम जी नित निवास करो.. [2] - श्री स्वामी हरिदास, केलीमल (43)