बचन दै मान न करौं
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 38 of 69
(राग कल्यान)
बचन दै मान न करौं।
मन बच क्रम तीन हूँ तें न टरौं॥ [1]
तेरेई कियें मान व्यापि होत
तन कहि कैसें कैं भरौं।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
कहत री प्यारी कैसें कैं लरौं॥ [2]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (59)
(राग कल्याण) बचन दै मन न कर कौन। मन बच क्रम तिन हूं तेन एन तरौं.. [1] मैं तुम्हारे अनेक मन-विस्तारित शरीरों को कैसे भर सकता हूं? श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी कहते हैं कि वह कितनी प्यारी हैं.. [2] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (59)