बचन दै मान न करौं
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 39 of 69
(राग कल्यान)
कुंजबिहारी नाचत नीके; लाड़िली नचावति नीके।
औघर ताल धरै श्रीस्यामा ताताथेई
ताताथेई गावति संग पी के॥ [1]
तांडव लास और अंग को गनें जे जे रुचि उपजति जी के।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कौ मेरु
सरस भयौ और रस गुनी परे फीके॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (60)
(राग कल्याण) कुंजबिहारी नाचत नीके; लेडी नचावती नाइके. औघड़ ताल धरै श्रीस्यामा ततथि ततथि गावति संग पीके.. [1] तांडव लास और अंग को गीत जे जे रुचि उपजति जी के. श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कौ मेरु सरस भयौ और रस गुणी पार फेंके.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (60)