नित्यविहार सों करि प्रीति
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 48 of 69
(राग विभास)
दुहुँनि की सहज बिसाँति दोऊ मिलि सतरंज खेलत। [1]
उर रुख नैंन चपल अस्व चतुर बराबरि झेलत॥ [2]
आतुरता फील पयादे निग्रह
फरजी चौंप अनूपम पेलत। [3]
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
सह साह राखैं खेलत॥ [4]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (81)
(राग विभास) मासूम महिलाओं का एक जोड़ा शतरंज खेल रहा था। [1]. [3] श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी सह सह राखैन खेलत.. [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (81)