कुंजबिहारी कौ बसन्त सखि
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 53 of 69
(राग गौड़)
नाचत मोरनि संग स्याम
मुदित स्यामाहिं रिझावत। [1]
तैसीयै कोकिला अलापत पपीहा देत सुर
तैसेई मेघ गरजि मृदंग बजावत॥ [2]
तैसीयै स्याम घटा निसि सी कारी
तैसीयै दामिनी कौंधि दीप दिखावत। [3]
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
रीझि राधे हँसि कंठ लगावत॥ [4]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (96)
(राग गौड़ा) नाचत मोरानी संग स्याम मुदित स्यामहिं रिझावत। [1]. [3] श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी, राधे हंसी कंठ लगावत.. [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (96)