सखी मोय बूँद अचानक लागी

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 52 of 69

(राग मलहार) दामिनि कहत मेघ सौं हमारी उपमा दैहिं ते झूठे एई मेघ एई बिजुरी साँची। जिन जिन हमारी उपमा दीनी तिन तिन की मति काँची॥ [1] ऐसी कहूँ सुनी जु बूँद तें कन न्यारौ ता पटतर क्यौं दीजै समुद्र राँची। श्रीहरिदास के स्वामी कुंजबिहारी की अटल अटल प्रीति माँची॥ [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (95) (राग मल्हारा) दामिनी कहती है मेघ सौं हमारी उपमा दहिन ते झूठे यानी मेघ यानी बिजुरी सांची। जिन हमारी उपमा, तिन तिन की माटी काँची.. [1] सुनो ऐसी मेरी, ये बूँदें मेरे कानों में क्यों, तुम मुझे सागर क्यों देते हो, राँची। श्री हरिदास स्वामी कुंजबिहारी की अटल अटल प्रीति मंची.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (95)
हिंडोरे झूलत री सुरंग चूनरी पहिरेंकुंजबिहारी कौ बसन्त सखि