प्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 64 of 69
(राग कानहरौ)
प्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ अपनपौं देखत,
तैसो तुम देखति हो किधौं नाहीं॥
हौं तोसौं कहौं प्यारे, आँखिन मूंदी रहौं,
लाल निकसि कहूं जाहिं॥
- स्वामी श्री हरिदास, केलिमाल (6)
(राग कानाहरौ) प्रिये, जैसे मैं तुम्हारे एकान्त मन में हूँ, मैं तुम्हें देखता हूँ, वैसे तुम देखते हो, मैं कहाँ जाऊँ.. मैं कहाँ जाऊँ प्रिय, क्या मैं नंगा रहूँ, मैं कहाँ जाऊँ.. - स्वामी श्री हरिदास, केलीमल (6)