बचन दै मान न करौं

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 63 of 69

जहाँ जहाँ चरन पडत प्यारी जू तेरे, तहँ तहँ मन मेरो करत फिरत परछाईं॥ - श्री हरिदास जी (ललिता अवतार), केलिमाल जहाँ भी तुम्हारे चरण पड़ते हैं, मेरी छाया हर जगह भटकती है.. - श्री हरिदास जी (ललिता अवतार), केलीमल
बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनीप्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ