द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 7 of 69
(राग कान्हरौ)
भूलैं-भूलैं मान न करि री प्यारी,
तेरी भौंहें मैली देखति प्रान न रहततन। [1]
ज्यौं न्यौछावर करौं प्यारी तो पै,
काहे तैं तू मूकी कहत श्यामघन॥ [2]
तोहि ऐसैं देखत मोहिंब
कल कैसें होइ जु प्रान-धन। [3]
सुनि हरिदास काहे न कहत,
सौं छाँड़िब छाँड़ि आपनौं पन॥ [4]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (10)
(राग कान्हारौ) भूलैन-भुलैन, तन-मन की प्यारी, भौहें गन्दी देखती जान। [1] प्रेम के लिए मैं जो कुछ भी त्यागता हूं, तुम मुझे श्यामघन क्यों कहते हो.. [2] इसलिए मैं तुम्हें इस तरह देखता हूं, मोहिंब, मैं कैसे जीवन की पूंजी बन गया हूं। [3] सुनि हरिदास कहे न कहत, सौं छंदइब छंदै अपनौं पान.. [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (10)