द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 6 of 69
(राग कान्हरौ)
दृष्टि चौंप बर फंदा मन राख्यौ लै पंछी बिहारी।
चुनों सुभाव प्रेम जल अंग स्त्रवत
पिवत न अघात रहे मुख निहारी॥ [1]
प्यारी प्यारी रटत रहत छिन ही छिन याकें और न कछु हिया री।
सुनी हरिदास पंछी नाना रंग देखत ही देखत ही प्यारी जू न हारी॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (9)
(राग कान्हारौ) दृष्टि चॉम्प बर फंदा मन राख्यौ लै पंछी बिहारी। अच्छी भावनाएँ, प्रेम, पानी, शरीर के अंग, तरल पदार्थ, पदार्थ चुनें, मुँह नहीं, जब तक वह साफ़ हो। सुनो हरिदास, पक्षी भिन्न-भिन्न रंग देख रहे हैं, वे प्यारे हैं, वे हरे-भरे हैं.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (9)