द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 9 of 69

(राग कान्हरौ) एक समै एकांत बन में करत सिंगार परस्पर दोई। वे उनके वे उनके प्रतिबिंबनि देखत रहत परस्पर भोई॥ [1] जैसैं नीके आजु बनैं ऐसौं कबहूँ न बनैं आरसी सब झूँठी परी कैसीयैब कोई॥ [2] श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी रीझि परस्पर प्रीनि नोई॥ [3] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (13) (राग कान्हरौ) एकांत में डूबे रहते हैं और एक-दूसरे को सजाने का मन करता है। वे अपने प्रतिबिंब को देखते रहे और एक-दूसरे के प्यार में डूबते रहे।
द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादाद्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा