परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 13 of 35
महल हमारे गुदी परयौ है।
हम भूलैं यह भूलैं नाहीं तन मन वचननि आनिं अरयौ है। [1]
छिन हीं छिन आनंद बढ़ावत गौर श्याम सुख हियें भरयौ है।
श्री हरिदासी रसिक केली में ललित किशोरी कों प्राण करयौ है॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (53)
महल हमारा गुड़ी परायु है। हम भुलक्कड़ नहीं हैं, हम भुलक्कड़ नहीं हैं, हम शरीर, मन, वाणी और शब्द नहीं हैं। [1] छिन ही छिन आनन्द बधावत गौर श्याम सुख ही भरयौ। श्री हरिदासी रसिक केलि को जीवनदान देने वाली ललित किशोरी कौन हैं? [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत पद (53)