परसाद विहारिनि रानी कौ

Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव

Verse 15 of 35

(सवैया) नाम महाधन है आपनो, नहीं दूसरी संपति और कमानी। [1] छांड अटारी अटा जग के, हमको कुटिया ब्रजमाहीं छवानी॥ [2] टूक मिले रसिकों की सदा, अरु पान सदा यमुना महारानी। [3] औरन की परवाहू नहीं, अपनी ठकुरानी श्री राधिका रानी॥ [4] - श्री ललित किशोरी (सवैया) नाम अपना धन है, पराया धन नहीं। [1] छंद अतरि अता जग के, हमको कुटिया ब्रजमहिं छावनी.. [2] छंद रसिका की सदा, अरु पान सदा यमुना महारानी। [3] औरन की परहु नहीं, हमारी ठकुरानी श्री राधिका रानी.. [4] - श्री ललित किशोरी
मेरी गति तुही है लडैती प्रानप्यारीजूपरसाद विहारिनि रानी कौ