परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 16 of 35
(राग गौरी)
परसाद विहारिनि रानी कौ।
अति आनंद बढै छिन ही छिन महा प्रेम सुखदानी कौ॥ [1]
जाकी सोभा कहत न आवै अद्भुत रूप निमानी कौ।
श्रीललितकिसोरी लाडलडावति अति जाननि मन जानी कौ॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (63)
(राग गौरी) परसाद विहारिणी रानी कौ। बड़ा आनंद, बधाई, प्रेम की छीना-झपटी, बड़ा आनंद... [1] आप यह क्यों नहीं कहते कि आप अद्भुत रूप में आये हैं? श्री ललित किशोरी लड़लदावति अति जननी मन जानि कोउ.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत पद (63)