परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 2 of 35
गुरु सोइ जो विपिन बसावे, गुरु सोइ जो हरिहि मिलावै।
या करनी विन गुरु न कहावै॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (137)
गुरु सोई जो विपीन बसावे, गुरु सोई जो हरिहि मिलवै। या करनी विन गुरु न कहावै.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की आवाज, सिद्धांत की सखी (137)