परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 3 of 35
(राग गौरी)
हमारो महल सदा सुखदाई।
प्रिया लाल कों रंग बढ़ावत छिन छिन प्रीति सवाई॥
छलकत छींट परी आनंद की ब्रज में नाँहि समाई।
यह गुप्त रीति हरिदास प्रकट करि रसिकन के मन भाई॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (39)
(राग गौरी) हमारा महल सदैव सुखी रहता है। प्रिया लाल, क्या रंग है थोड़ा थोड़ा प्यार है... परी आनंद के ब्रज में प्यार की हल्की सी फुहार है। रसिकन के मन में हरिदास के इस गुप्त अनुष्ठान को उजागर करो भाई.. - श्री ललित किशोरी देव के वचन, सिद्धांत, श्री ललित किशोरी देव जू (39)