परसाद विहारिनि रानी कौ

Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव

Verse 29 of 35

तुव कृपा ते लाडिली तेरो सुख लहियै। [1] तू मेरी जीवनि प्रान है कासौं यह कहियै॥ [2] यह मनोरथ लाडिली अंग संग नित रहियै। [3] ढील न कीजे लाडिली हसि कंठ लगैयै॥ [4] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (32) आपके आशीर्वाद से आपकी खुशियाँ मंगलमय हो प्रिये। [1] तुम ही मेरा जीवन और आत्मा हो। मैं यह कैसे कह सकता हूं.. [2] आप हमेशा अपने जीवन के इस प्यारे हिस्से के साथ रहें। [3].
परसाद विहारिनि रानी कौश्री निधिवनराज की जै रहियै