परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 28 of 35
तो सी तुही हरिदास दुलारी।
तेरी सरि दूजौ नहिं कोई तेरेई रस बस कुंज बिहारी॥ [1]
तेरौ रूप कहत नहिं आवै तैसीये तेरी प्रीति महा री।
तैसीये ललित केलि सुखरासी रसिकसिरोमनि प्रान अधारी॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (55)
सो सी तुहि हरिदास दुलारी। न तुझसे प्यार, न तुझमें दिलचस्पी, बस कुंजबिहारी.. [1] तेरा हुस्न तो कुछ कहता नहीं, पर तेरा प्यार बहुत बड़ा है। तैसिये ललित केलि सुखारसि रसिकशिरोमणि प्राण अधारी.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू के वचन, सिद्धांत (55)